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एक बहुत बड़ा सवाल : बच्चे क्यों नहीं कर पाते अपने मन की बात अपने ही पेरेंट्स क साथ?

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                                       एक बहुत बड़ा सवाल ?

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                          बच्चे क्यों नहीं कर पाते अपने मन की बात अपने ही पेरेंट्स क साथ?

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आज के समय में यह एक बहुत बड़ा सवाल बनकर हमारे सामने खड़ा हुआ है |जिसका हमारे पास कोई जवाब नहीं है,या हम खुद ही इसका जवाब  नहीं  ढूँढना नहीं चाहते क्युकी हमारे पास एक बहुत बड़ा बहाना जो है की हम बहुत बिजी टाइम ही नहीं है…..

चलिए आज एक  और सवाल का आप खुद ही जवाब दीजिये….सारे दिन में आप सबसे जयादा बार’ तुम गलत हो’ यह किसे  कहते हैं??

                    जवाब हैं अपने  बच्चे कोहैं ना

Gently Remind Your Child of Previous Good Behavior | wikifeed.in

वैसे हमारा उदेश्ये  सही होता है की जो हमें सही लगता हम हमारे बच्चो को वही सिखाते क्यूंकि उनमे अभी समझ थोड़ी होती और हम उनसे ज़्यदा अनुभवी जो होते ,लेकिन क्या जो हमारे अनुसार सही होता है वो हर बार सही तो नहीं हो सकता और बच्चे हर जगह गलत नहीं हो सकते जैसे की बच्चो को कहना की , तुम्हारा अभी खेलने का टाइम गलत ,अभी तो पढ़ने का टाइम या  अभी मत टीवी देखो अभी मत फ्रेंड्स साथ बहार mat जाओ ,तुम्हारा फेस बुक करना गलत गाड़ी चलना इतनी स्पीड में गलत ., वग़ैरह

जरा सोचिये सरे दिन बच्चे गलत गलत ही सुनेंगे तो उनमे भी neagtivity   आने लगेगी और एक बार जब यह बात उनको दिमाग में बैठ गई तो आपकी सही बात भी उन्हें गलत लगने लगेगी और ऐसा करते करते वो आपसे झूट भी बोलने लगेंगे और बातें भी छुपाने लगेंगे जिसे हम जनरेशन गैप का नाम दे देते लेकिन यह रेस्पेक्ट का गैप | दरसल हमारी बातों का असर बच्चो पर काम होता जाता

Why is there a big communication gap between parents and adult kids about personal finance | wikifeed.in

यह बिलकुल सच की पेरेंट्स हमेशा सही होते लेकिन बच्चे भी हमेशा गलत नै होते..बस जरुरत तो हमे उनके नज़रिये से देखने और समझने की ..अपनी उन तक ऐसे समझाए की वो बी गलत हो और हमारे सही संस्कार भी उन तक पोहुंच जाए| जब बच्चे छोटे होते   तब अपनी सरे बातें होने बताते क्यूंकि उन्हें पता की मेरी बात पूरी सुनी जाएगी और मुझे रिजेक्शन नहीं  मिलेगा लेकिन  वही बच्चा जब बड़ा होता तब हम उनसे पूछते की क्या क्या हुआ लेकिन वो तब बताना बंद कर देता क्यूंकि उसे लगता   कोई बात  पेरेंट्स को सही लगेगी या नहीं ,वो उसे समझेंगे या नहीं,उसे गलत ही कहा जाएगा तो वो बताना ही बंद कर देता है|

क्या सही हुआ? नहीं हमारा बच्चा हमसे खुलकर बात नै कर रहा इसके जिम्मेदार भी सिर्फ हम ही   कारण रिजेक्शन ऑफ़ चाइल्ड

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हमे चईयेः की हमारा बच्चा किसी कॉउंसलर पास अपनी समस्या  लेके जाने के बजाय हमे सरे बात बताये और हम को  उसकी पूरी प्रॉब्लम को नसून कर प्यार से समझाएं उसके दोस्त भी बने और अपना वक़्त भी दे

एक इंटरनेट गेम बलुएवहले इस गैप का सबसे बड़ा उदाहरण है ,बच्चे क्या कर रहे .कितनी देर कोनसा गेम खेल रहे पेरेंट्स को पता ही नहीं लग पता और यह तक की उनके हाथ पर लगे निशान को भी माता पिता देख नै पाते और अंजाम सबके सामने बच्चो का सुसाइड

जागिये और अपने बच्चो  से बात करिये ,दोस्त बनाइये और उनको भी समझने की कोशिश करिये

               बचा लीजिये उनको इस मौत के खेल से

 

     Thanks :

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