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Surgical Strike: पाकिस्तान में मसूद अजहर का भाई इब्राहिम अजहर मारा गया…

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मसूद अजहर का बड़ा भाई इब्राहिम अजहर और उसका साला युसूफ अजहर मारा गया…Surgical Strike 2.0 Masood Azhar’s brother Ibrahim killed in air strikes

Surgical Strike 2.0 Masood Azhar’s brother Ibrahim killed in air strikes – 24 दिसंबर 1999 का दिन भारत के इतिहास में एक काला दिन था, जब आतंकियों ने काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट Tribhuvan International Airport से इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को हाइजैक कर लिया था। भारत सरकार Indian government को जनता के बढ़ते दबाव के चलते तीन दुर्दांत आतंकियों को रिहा करना पड़ा था। रिहा होने वाले आतंकियों में जैश ए मोहम्मद Jaish-e-Mohammad का मुखिया अजहर मसूद भी था और प्लेन को अगवा करने वालों में शामिल था अजहर का भाई इब्राहिम अजहर Masood Azhar’s brother Ibrahim Azhar.

 

भारत ने आज इब्राहिम अजहर Ibrahim Azhar को एयर स्ट्राइक में मार गिराया है। इब्राहिम Ibrahim की मौत को जैश और अजहर Azhar के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उसके खिलाफ भारत नें रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर रखा था। इसके साथ ही अजहर मसूद के कुछ नजदीकी रिश्तेदारों के भी मारे जाने की खबर है। जिसमें अजहर मसूद का भाई मौलाना तल्हा सैफ, साला यूसुफ अजहर, जैश का कश्मीर प्रमुख मौलाना अम्मार और कश्मीर में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार मौलाना अजहर खान शामिल है।

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कंधार हाईजैक को उस वक्त अंजाम दिया गया था जब वह इंडियन एयरलाइंस का प्लेन IC-814 काठमांडू से उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था। 24 दिसंबर 1999 को शाम पांच बजे जैसे ही ही विमान भारतीय वायु क्षेत्र में दाखिल होता है, अपहरणकर्ता हरकत में आते हैं और विमान को अगवा कर लिया जाता है। शाम छह बजे विमान अमृतसर में थोड़ी देर के लिए रुकता है और वहां से लाहौर के लिए रवाना हो जाता है।

अगवा विमान रात आठ बजकर सात मिनट पर लाहौर में लैंड करता है। लाहौर से दुबई के रास्ते होते हुए इंडियन एयरलाइंस का ये अपहृत विमान अगले दिन सुबह के तकरीबन साढ़े आठ बजे अफ़ग़ानिस्तान में कंधार की ज़मीन पर पहुंच जाता है। उस वक्त वहां तालिबाल का शासन था।

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विमान पर उस वक्त 180 लोग सवार थे। उधर विमान में अगवा यात्रियों के परिजन सरकार पर दबाव बना रहे थे। आतंकियों ने भारत सरकार से 36 चरमपंथी साथियों की रिहाई के साथ-साथ 20 करोड़ अमरीकी डॉलर की फिरौती की मांग रखी थी। 31 दिसंबर को सरकार और अपहरणकर्ताओं के बीच समझौते के बाद दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट पर अगवा रखे गए सभी 155 बंधकों को रिहा कर दिया गया। ये ड्रामा उस वक्त ख़त्म हुआ जब वाजपेयी सरकार भारतीय जेलों में बंद कुछ चरमपंथियों को रिहा करने के लिए तैयार हो गई।

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तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के विदेश मंत्री जसवंत सिंह ख़ुद तीन चरमपंथियों अपने साथ कंधार ले गए थे। छोड़े गए चरमपंथियों में जैश-ए -मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर, अहमद ज़रगर और शेख अहमद उमर सईद शामिल थे।

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