Barsana Lathmar Holi - wikifeed
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Special Holi 2018 : How to Celebrate Holi in State: Latthmar Holi fames in UP

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Holi 2018: How to Celebrate Holi in In State: Lattathmar Holi is quite fames in UP.

Special Holi 2018 Barsana Lathmar Holi 2018: (बरसाना लठमार होली)

दरअसल (Special Holi 2018 Barsana Lathmar Holi) भगवान कृष्ण के काल में उनके द्वारा की जाने वाली लीलाओं की पुनरावृत्ति जैसी है। माना जाता है कि कृष्ण अपने सखाओं के साथ इसी प्रकार कमर में फेंटा लगाए राधारानी तथा उनकी सखियों से होली खेलने पहुंच जाते थे तथा उनके साथ ठिठोली करते थे जिस पर राधारानी तथा उनकी सखियां ग्वाल वालों पर डंडे बरसाया करती थीं। ऐसे में लाठी-डंडों की मार से बचने के लिए ग्वाल वृंद भी लाठी या ढ़ालों का प्रयोग किया करते थे जो धीरे-धीरे होली की परंपरा बन गया। उसी का परिणाम है कि आज भी इस परंपरा का निर्वहन उसी रूप में किया जाता है।

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जब नाचते झूमते लोग गांव में पहुंचते हैं तो औरतें हाथ में ली हुई लाठियों से उन्हें पीटना शुरू कर देती हैं और पुरुष खुद को बचाते भागते हैं। लेकिन खास बात यह है कि यह सब मारना पीटना हंसी खुशी के वातावरण में होता है। औरतें अपने गांवों के पुरूषों पर लाठियां नहीं बरसातीं. बाकी आसपास खड़े लोग बीच बीच में रंग बरसाते हुए दिखते हैं।

इस होली(Special Holi 2018) को देखने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग बरसाना आते हैं। यह लट्ठमार होली आज भी बरसाना की औरतों/ लड़कियों और नंदगांव के आदमियों/ लड़कों के बीच खेली जाती है।

Tradition of celebrating Holi in Uttarakhand: (उतराखण्ड में होली मनाने की परम्परा )

 देश के कई हिस्सों में जहाँ होली खेलने के बाद नए कपड़े पहनने का रिवाज है, वहीं उत्तराखंड में होली के त्योहार पर नए कपड़ों से होली (Holi) खेली जाती है। चटख सफेद रंग का कुर्ता-पयजामा पुरुषों की टोली पहनती है तो महिलाएँ परंपरागत साड़ियाँ पहनती हैं। होली (Special Holi 2018) से करीब सप्ताह भर पहले इन कपड़ों में रंग छिड़का जाता है। उसके बाद प्रतिदिन होली सम्मेलन में अबीर गुलाल लगाया जाता है।

Tradition of celebrating Holi in Uttarakhand - wikifeed

महिला-पुरुष की अलग-अलग होली :- एकादशी से होली का त्योहार पूरे शबाब पर रहता है। दिन में महिलाओं का समूह अलग-अलग घरों में होली का आयोजन करता है तो रात में पुरुषों की टोली होली गाती है। इस दौरान आलू की चाट, नींबू की सानी और फलों का वितरण होता है। यह अलग बात है कि छिप-छिपकर दोनों टोली एक-दूसरे की होली की ठिठोली देखते हैं।

“Hola Mohalla” of Punjab: (पंजाब की होली )

इस अवसर पर, भांग की तरंग में मस्त घोड़ों पर सवार निहंग, हाथ में निशान साहब उठाए तलवारों के करतब दिखा कर साहस, पौरुष और उल्लास का प्रदर्शन करते हैं। जुलूस तीन काले बकरों की बलि से प्रारंभ होता है। एक ही झटके से बकरे की गर्दन धड़ से अलग करके उसके मांस से ‘महा प्रसाद’ पका कर वितरित किया जाता है। पंज पियारे जुलूस का नेतृत्व करते हुए रंगों की बरसात करते हैं और जुलूस में निहंगों के अखाड़े नंगी तलवारों के करतब दिखते हुए बोले सो निहाल के नारे बुलंद करते हैं। आनन्दपुर साहिब की सजावट की जाती है और विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है। कहते है गुरु गोबिन्द सिंह (सिक्खों के दसवें गुरु) ने स्वयं इस मेले की शुरुआत की थी। यह जुलूस हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहती एक छोटी नदी चरण गंगा के तट पर समाप्त होता है।

Hola Mohalla of Punjab - wikifeed

“Dhulendi” of Haryana:  (हरियाणा की “धुलेंडी”)

धुलेंडी हरियाणा की होली के रूप में प्रसिद्ध उत्सव है। भारतीय संस्‍कृति में रिश्‍तों और प्रकृति के बीच सामंजस्‍य का अनोखा मिश्रण हरियाणा की होली में देखने को मिलता है। हरियाणा में होली धुलेंडी के रूप में मनाते हैं और सूखी होली गुलाल और अबीर से खेलते हैं।

Dhulendi of Haryana - wikifeed

भाभियों को धुलेंडी के दिन पूरी छूट रहती है कि वे अपने देवरों को साल भर सताने का दण्ड दें। भाभियाँ देवरों को तरह-तरह से सताती हैं और देवर बेचारे चुपचाप झेलते हैं, क्योंकि इस दिन तो भाभियों का दिन होता है। शाम को देवर अपनी प्यारी भाभी के लिए उपहार लाता है और भाभी उसे आशीर्वाद देती है लेकिन उपहार और आशीर्वाद के बाद फिर शुरू हो जाता है देवर और भाभी के पवित्र रिश्‍ते की नोकझोंक और एक-दूसरे को सताए जाने का सिलसिला। इस दिन मटका फोड़ने का भी कार्यक्रम आयोजित होता है।

“Holi” of Rajasthan : (राजस्थान की “होली”)

राजस्थान में मुख्यत: तीन प्रकार की होली होती है। माली होली– इसमें माली जात के मर्द, औरतों पर पानी डालते है और बदले में औरतें मर्दों की लाठियों से पिटाई करती है। इसके अलावा गोदाजी की गैर होली और बीकानेर की डोलची होली भी बेहद ख़ूबसूरत होती है।

Holi of Rajasthan - wikifeed

  • लट्ठमार होली 
  • गैर नृत्य, (Non-Dance Holi)
  • मुर्दे की सवारी,(Morning ride Holi)
  • चंग-गींदड,(Ching-Geind Holi)
  • तणी काटना,(Cutting Stems Holi)
  • कोड़े वाली होली,(Hogi Holi)
  • भीलों की होली,(Naturals of Holi)

 

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