Pervez Musharraf sentenced to death - wikifeed
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PAK के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) को फांसी की सजा

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दुबई के अस्पताल में भर्ती PAK के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ Pervez Musharraf को फांसी की सजा

(दुबई के अस्पताल में भर्ती PAK पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) के समर्थन में उतरी पाकिस्तानी आर्मी, फांसी की सजा पर कहा- देश की रक्षा करने वाला गद्दार नहीं हो सकता)

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को फांसी की सजा सुनाई गई है. (Pakistan’s x President Pervez Musharraf sentenced to death.) पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार पेशावर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस वकार अहमद सेठ की अध्यक्षता में विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को ऐसी सजा सुनाई. फिलहाल, परवेज मुशर्रफ दुबई में हैं. 3 नवंबर, 2007 को देश में इमरजेंसी लगाने के जुर्म में परवेज मुशर्रफ पर दिसंबर 2013 में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था. मुशर्रफ को 31 मार्च, 2014 को दोषी ठहराया गया था.

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दुबई Dubai के अस्पताल में भर्ती PAK पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ Pervez Musharraf पर पाक सरकार ने कहा है कि उन्हें वापस लाने के कानूनी रास्तों पर सरकार विचार करेगी। हालांकि उन्हें पाकिस्तान लाना ही मौजूदा सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। वे मार्च 2016 को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद दुबई चले गए थे, इस बीच विशेष कोर्ट ने उन्हें भगौड़ा तक करार दे दिया था।

इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने लाहौर हाईकोर्ट (एलएचसी) में एक याचिका दायर कर इस्लामाबाद की एक विशेष अदालत के समक्ष मुकदमे की लंबित कार्यवाही पर रोक लगाने का आग्रह किया था. उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला है.

पाकिस्तान के पूर्व आर्मी चीफ जनरल परवेज मुशर्रफ तानाशाह रहे हैं जिन्होंने नवाज शरीफ का तख्तापलट किया था। वैसे पाकिस्तान में सैन्य शासन और तानाशाही का लंबा इतिहास रहा है। आजादी के बाद जहां भारत में लोकतंत्र फला-फूला, वहीं पाकिस्तान में तानाशाही। वक्त-वक्त पर सैन्य शासक पाकिस्तान में लोकतंत्र को अपने बूटों तले रौंदते रहे हैं।

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भारत के खिलाफ आतंकियों के शिविरों को बढ़ावा देने का गुनाह स्वीकार कर चुके मुशर्रफ फिलहाल दुबई में अपना इलाज करवा रहे हैं। सुनवाई के समय कई दफा तलब किए जाने के बावजूद वे विशेष कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए हैं। दूसरी ओर पीएम इमरान खान की सूचना और प्रसारण पर विशेष सहायक फिरदौस आशिक अवान ने कहा कि सरकार अदालत के फैसले से राष्ट्रहित व सियासी असर पर विस्तार से समीक्षा करेगी।

पाकिस्तान के डीजी आईएसपीआर ने इसको लेकर एक ट्वीट किया है और लेटर शेयर किया है। जिसमें कहा गया है कि पूर्व सेना प्रमुख, स्टाफ कमिटी के ज्वाइंट चीफ और पूर्व राष्ट्रपति जिसने 40 साल तक देश की सेवा की और युद्धों में भाग लिया वो गद्दार नहीं हो सकता है।

इस्लामाबाद में अवान ने पत्रकारों से कहा कि सरकार ने कानून विशेषज्ञों से चर्चा की है। इसमें फैसले के कानूनी व सियासी पहलु और राष्ट्रहित पर प्रभाव का विश्लेषण हुआ। मुशर्रफ को पाकिस्तान वापस लाने के सवाल पर अवान ने कहा कि इस प्रकिया पर भी कानूनी टीम के साथ सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बुधवार को विदेश यात्रा से लौटकर जमीनी हकीकत और कानूनी प्रावधानों को देखेंगे और इसके बाद कोई फैसला लिया जाएगा।

दूसरी ओर फैसला आने के फौरन बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने ट्वीट किया, ‘लोकतंत्र सबसे अच्छा बदला है।’

पाक इतिहास में सजा-ए-मौत पाने वाले पहले सैन्य शासक

पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ Pervez Musharraf sentenced to death को पेशावर की विशेष अदालत ने मंगलवार को देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा सुनाई। भारत के साथ 1999 के कारगिल युद्ध की योजना बनाने वाले मुशर्रफ पाकिस्तान के इतिहास में मौत की सजा पाने वाले पहले सैन्य शासक और दूसरे शीर्ष अधिकारी हैं। उनसे पहले जुल्फिकार अली भुट्टो को 1977 में प्रधानमंत्री पद से हटाकर फांसी पर चढ़ा दिया गया था।

मुशर्रफ पर देशद्रोह का आरोप

मुशर्रफ पर 2007 में निर्वाचित सरकार का तख्तापलट करने के बाद आपातकाल घोषित करने के लिए देशद्रोह का आरोप था। इस आरोप की सुनवाई पेशावर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वकार अहमद सेठ की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही थी। मंगलवार को पीठ ने इसे अपराध मानते हुए मुशर्रफ के खिलाफ 2-1 के मत से फैसला सुनाया। मुशर्रफ के खिलाफ 2014 में यह मामला शुरू हुआ था।

इसके बाद मुशर्रफ मार्च 2016 में इलाज कराने के नाम पर दुबई चले गए और फिर सुरक्षा, स्वास्थ्य का हवाला देते हुए वह कभी वापस नहीं लौटे। जस्टिस सेठ, जस्टिस नजर अकबर और जस्टिस शाहिद करीम की पीठ ने इस मामले में अपना फैसला 19 नवंबर को सुरक्षित रखा था। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 27 नवंबर को इस फैसले को सुनाने पर रोक लगाते हुए सरकार को 5 दिसंबर तक नई अभियोजन टीम बनाने का भी निर्देश दिया था।

सरकार द्वारा गठित नई टीम पांच दिसंबर को विशेष अदालत के समक्ष पेश हुई, इसके बाद विशेष अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 17 दिसंबर की तारीख तय की थी।

 

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