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25 अगस्त को गणेश चतुर्थी के दिन भूल कर भी नहीं करे चन्द्रमा के दर्शेन !

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मेरे प्रिय सिशियो और साधको और आजके मेरे नविन प्रेय दर्शको “गणपति बाबा मोरया”यह शब्द एक साल में 10 दिनों के लिए आता हे ,हमारे दिल दिमाग परिवार और आस पड़ोस में ये मानलो या फेर ये कहें की पुरे ब्रह्माण्ड में गूंजे जाते हे। इस वर्ष 25 अगस्त 2017 से अगले 10 दिनों के लिए 5 स्तिम्बर तक बनाया जाएगा। (गणेश तान्त्र मोहत्सव) .

इस महोत्सव देव अति देव गणपति का घर प्रवेश जो लायगे वृद्धि ,बुद्धि ,सौभागय और खुशयाली और शांति और आपके सारे विघ्न हट जायगे और आपके जीवन में छा जायगी खुशयाली तो 25 अगस्त से 5 स्तिम्बर तक बनाए पुरे धूम धाम से देश में गणेश चतुर्थी महोत्सव श्री गणेश के ग्रह परवेस की जो भी अपने तयारिया की हे उस महोत्सव को सही तरह से बनाने के हर प्रकार के जो भी आपके मन में जिज्ञासा या प्रशान हे। उन सबका जवाब में आपको बताता हु,

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सबसे पहले में आपको बताता हु शुभ समय जिस पर आपको श्री गणेश जी को घर प्रवेश करना हे आपको गणेश चतुर्थी के दिन बहुत सूंदर सयोग का निर्माण होना इस दिन हस्त्र नछतर के साथ चद्र्मा के कन्या राशि में देव गरू बृहस्पति के साथ ब्रजमान होकर गज़ केसरी युग का निर्माण हो रहा हे। “ये सुंदर योग घटित हो रहा हे गज केसरी इसका मतलब हे भगवन गणपति का जो शर हे वो गज़(हाथी ) का हे।,और गज केसरी का मतलब हे की गरू और चन्द्रमा इस दिन एक साथ रहेंगे।

लाभ का चोकडिया सुबह 7:57 से लेकर 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगा और साथ ही अमृत को चौकडिया 9 :30 मिनट से लेकर 10 :30 मिनट तक रहेगा। वही दोपहर 10 :40 मिनट से 2 :15 मिनट तक शुभ का चोकडिया रहेगा ,इन सभी मोहरत में आप सभी भगवान गणपति को घर में ला सकते हे। लेकिन 10 :30 मिनट से लेकर 12 :30 मिनट तक राहु रहेगा इस समय में आप शुभ और मगलेय कार्य नहीं कर सकते हो और नहीं गणपति का प्रवेश कराए।

गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन कियो नहीं करने चाहये

इतना खूब शूरत ग्रह को देखकर ईद बनाई जाती हे, करवा चौथ बनाया जाता हे एक इन्शान अपनी प्रेमिका का के चहरे को उस चाँद में देखता हे। फिर हम गणेश चतुर्थी पर चाँद को कियो नहीं देख सकते हे “एक बार चूहे पर सवारी करते समय गणेश जी फिशल गए थे तो चन्द्रमा को हसी आ गई जब गणेश जी फिशल ने पर चन्द्रमा को हसी अगिए तो गणेश जी इस बात के लेकर बहुत क्रोधित हो उठे और उन्होंने ‘चन्द्रमा को श्राप दे डाला’ की चंद्र अब तुम किसी के देखने के योगीय नहीं रहोगे उस समय इतनी शक्तिया हुवा करती थी की साधु शांत भी शार्प दे देते थे तो वह कई जन्मो तक भी श्राप मुक्त नहीं होता था।

तो ये तो फेर देव अति देव महादेव के परम प्रिय पुत्र गणेश जी थे जिन्हने चन्द्रमा को शार्प दिया था यदि तुम्हे किसी ने देख लिया तो वह पाप का भागी हो गा यह चन्द्रमा को भगवान श्री गणेश ने शार्प दिया था। इतना कहकर गणेश जी वह से चले गए और चन्द्रमा अपने मन में ही कहने लगे “सर्व गुण समपण जगत पालक परमेश्वर के साथ मेने मूर्ख की भाती बुरा चरण कैसे कर दिया में सबके लिए अदर्शनीय हु और अत्यन्त मलयन्त कैसे हो गया ये गुन्हा 16 कला से युक्त सूंदर और देवताओ के लिए सुखात कैसे हो सकता हु।

चन्द्रमा के अंत दर्शन से देव गरु भी दुखी हुवे अग्नि और इन्द्र अदि देव गन सभी एकत्र होकर भगवन गाजा नन्द के पास पहुंचकर उनसे प्राथना करने लगे और जब भगवान श्री गणेश ने खा की देवताओ में तुम्हारी प्राथना से प्रशन हु वर मागो में उसे अवस्य पूर्ण करुगा देव बोले की प्रभु आप चन्द्रमा पर अनुग्रह करे हमरी यह कामना हे श्री गणेश ने कहा की देवो में अपना वचन कैसे अर्धपूर्ण कर सकता हु जो मेने कहा हे में उसे खुद कैसे ठुकरा दू और मेने तुम्हे वर मांगने को भी कहा हे में से भी नहीं ठुक रहा सकता हु।

तो श्री गणेश ने इस बिकट परिस्थति में देवो से कहा की सुमेरु अपना स्थान त्याग दे सूर्य गिर पड़े अग्नि शीतल हो जाये और सागर अपनी मर्यादा को छोड़ दे पर मेरा वचन अस्तेय नहीं हो सकता हे जो व्यक्ति जानकर या अनजाने में ही गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दरशन करेगा अभी शाक्त हो गा या झूठा आरोप लगेगा बहुत सी बार अपने देखा होगा की कोर्ट मुकदमा के तहत भी जेल चले गए बहुत सारी ऐसी गलती का सामना करना पड़ जाता हे तो भक्तो गणेश चतुर्थी के दिन भी अपने गलती से भी चन्द्रमा देख लिया तो हमारे ऊपर झूह्टे और और बहुत सी विधाए आजाएगी। और यदि देव वसात चन्द्रमा के दर्शन हो जाए तो इस दोष से बचने की लिए श्री भागवत कथा का 10 व स्कन्द पढ़ ले या फिर महाभारत वर्णित सरयंकित कथा का पाठ पढ़ ले। और आपका यह दोस समाप्त हो जायगा।

देवताओ ने चन्द्रमा से कहा के हे चन्दर तुमने गज पर हस कर मूर्खता का परचै दिया हे ,तुमने परम् पुत्र का अपमान किया और तिरलोक के कट्ग्रस्त हो गया हम लोगो ने तिरलोक के ब्रह्मनायक सर्व गरू और सर्व गुण के दाता गजा नद के प्रभु के बड़े यत्न से संतुस्ट किया हे इस कारण उन्होंने तुम दया के कारण इस शार्प से मुक्त किया हे वर्ष में केवल एक दिन भारत शुल्क चतुर्थी को आदरसनेय रहने का वचन देकर अपना शाप अत्यंत सिमित कर दिया तुम भी उन करुणा दर की शरण लो और उनकी कृपा से सुध होकर यश को प्राप्त करो।

श्री गणेश का मुख काटने के बाद कहा गया

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किया आप सभी जानते हे या फिर आपके मन में कभी ख्याल आया की जब गणेश जी का मस्तक जब कटा उसके स्थान पर गज मुख को तो लगा दिया लेकिन उनका असली मस्तक कहा गया एक बार माता पार्वती ने अपने तन के मेल से श्री गणेश का स्वरूप तैयार किया और और उनमे प्राण फुक दिय और स्नान होने पर गणेश जी को दुवार पर पहरा होने पर खड़ा कर दिया यह कहकर किसी को भी अंदर प्रवेश मत करने देना उसी दौरान वह पर भगवान संकर आए और गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोका अनजाने में भगवान शंकर ने श्री गणेश जी का मस्तक काट दिया बाद में भगवन शंकर ने पार्वती को रूठी हुए पार्वती को मनाने के लिए कटे मस्तक के स्थान पर हाथी का मस्तक लगा दिया लेकिन उनका असली मस्तक वो चंद्र लोक में चला गया ऐसी आस्था से सभी भक्त जन गणेश चतुर्थी के दिन चन्दर दरशन करके उन्हें पूजा का आसिर्वाद लेकर पूजा आरम्भ करते हे।

अब में आपको को श्री गणेश जी की पूजा के लिए विशेष बातें बताने जा रहा हु,

जिनका पूजा में विशेष बातो का धेयान रखना चाहये गणेश की पूजा में तुलसी का दल निषेद हे यानि की उनकी पूजा में तुलसी की पूजा नहीं करनी चाहये दूर्वा गणेश को अति प्रेय हे जबी आप उन पर दूर्वा चढ़ाये और वह शुद्ध और साफ होनी चाहये तीन पती या पांच पती ये दो प्रकार की दूर्वा अति हे सबसे अच्छी पांच पती की सर्वश्रेस्ठ मणि जाती हे गणेश जी की पूजा करते समय किसी भी बात का क्रोध नहीं करना चाहये और पर्सन होकर पूर्ण तरीके से गणेश जी की पूजा अर्चना करनी चाहये छमा करदेना चाहये और छमा मांग लेनी चाहये पूजा के समय 10 दिनों की विसेष पूजा पूरा परिवार मिलकर धूम धाम से पूजा वंदना करे।

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