Navratri 2020 Ghat Sthapana - wikifeed
(Navratri 2020 Ghat Sthapana) नवरात्रि में घटस्थापना का बहुत महत्व होता है। नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से की जाती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित (Navratri 2020 Kalash Sthapana) किया जाता है। घटस्थापना प्रतिपदा तिथि के पहले एक तिहाई हिस्से में कर लेनी चाहिए। इसे 'कलश स्थापना' भी कहते हैं।
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Navratri 2020: नवरात्रि में क्यों करते हैं, घटस्थापना जानिए शुभ मुहुर्त, सामग्री और इसका महत्व

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Navratri 2020: नवरात्रि में क्यों करते हैं, घटस्थापना जानिए शुभ मुहुर्त, सामग्री और इसका महत्व

शारदीय नवरात्रि (Shardiya navratri 2020) पर्व हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। देवी शक्ति की उपासना का यह पर्व 17 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र (Navratri 2020) पर्व शुरू होता है जो नवमी तिथि तक चलता है। नवरात्रि (Navratri) में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना होती है और भक्त नौ दिनों तक माता रानी का व्रत करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन जहां शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (Ghat Sthapana) या कलश स्थापना (Kalash Sthapana) करने का विधान है तो वहीं आखिरी दिन कन्या पूजन करके व्रत खोला जाता है। आइए जानते हैं घर पर किस शुभ मुहुर्त में करें घटस्थापना या कलश स्थापना

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(Navratri 2020 Ghat Sthapana) नवरात्रि में घटस्थापना का बहुत महत्व होता है। नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से की जाती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित (Navratri 2020 Kalash Sthapana) किया जाता है। घटस्थापना प्रतिपदा तिथि के पहले एक तिहाई हिस्से में कर लेनी चाहिए। इसे ‘कलश स्थापना’ भी कहते हैं।

जानिए नवरात्रि में क्यों करते हैं घटस्थापना (Ghat Sthapana) और इसका महत्व

(Navratri 2020 Ghat Sthapana) नवरात्रि में घटस्थापना का बहुत महत्व होता है। नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से की जाती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित (Navratri 2020 Kalash Sthapana) किया जाता है। घटस्थापना प्रतिपदा तिथि के पहले एक तिहाई हिस्से में कर लेनी चाहिए। इसे ‘कलश स्थापना’ भी कहते हैं।

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कलश (Kalash Sthapana) को सुख- समृद्धि, ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु, गले में रुद्र, मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्रि के समय ब्रह्मांड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है। इससे घर की सभी विपदादायक तरंगें नष्ट हो जाती हैं तथा घर में सुख-शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।

घटस्थापना की सामग्री

जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र, यह वेदी कहलाती है। जौ बोने के लिए शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमें कंकर आदि न हो।, घटस्थापना के लिए मिट्टी का कलश, कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, रोली, मौली, इत्र व पूजा में काम आने वाली साबुत सुपारी, दूर्वा, कलश में रखने के लिए सिक्का, पंचरत्न, पीपल, बरगद, जामुन, अशोक और आम के पत्ते कोई भी 2 प्रकार के पत्ते ले सकते हैं, कलश ढंकने के लिए ढक्कन मिट्टी का या तांबे का ढक्कन में रखने के लिए साबुत चावल, नारियल, लाल कपड़ा, फूल माला, फल तथा मिठाई, दीपक, धूप, अगरबत्ती आदि लें।

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घटस्थापना का शुभ मुहुर्त

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना (Kalash Sthapana) या घटस्थापना (Ghat Sthapana) का शुभ मुहुर्त सुबह 6:30 से सुबह 10:12 बजे तक कर सकते है. घटस्थापना के लिए अभी अभिजित मुहुर्त प्रातः काल 11:44 से 12:29 तक रहेगा।

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