Maa Shailputr ki puja - wikifeed
Navratri 2020 : आज दोपहर और शाम को मां शैलपुत्री की करें अराधना, मिलेगा मन चाहा फल
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Navratri 2020 : आज दोपहर और शाम को मां शैलपुत्री की करें अराधना, मिलेगा मन चाहा फल

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Navratri 2020 : आज दोपहर और शाम को मां शैलपुत्री की करें पूजा (Maa Shailputr ki puja), अराधना, मिलेगा मन चाहा फल

Sharadiya Navratri 2020 (शारदीय नवरात्र 2020) शनिवार यानी आज से शुरू हो गए है. इस नवरात्र (Navratri) का विशेष महत्व है. आज के दिन मां दुर्गा (Maa Durga) का आगमन स्वर्ग से धरती पर होगा. हिंदू धर्म में इन नौ दिनों का बहुत अधिक महत्व होता है. नवरात्र में देवी के नौ रूपों की पूजा धूमधाम से की जाती हैं. हर एक दिन देवी के अलग-अलग रूप की उपासना करने से भक्त को आशीर्वाद मिलता है. नवरात्री के पहले दिन यानी आज दिन मां शैलपुत्री की पूजा (Maa Shailputr ki puja), अराधना, और आरती करते है. तो आये हम आप को बताते है की कौन है मां शैलपुत्री (Maa Shailputr) और कैसे करते है इनकी पूजा और प्राथना।

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Navratri 2020 : आज दोपहर और शाम को मां शैलपुत्री की करें अराधना, मिलेगा मन चाहा फल

कौन है मां शैलपुत्री (Maa Shailputr)

प्रथम पूजयते गणेश जी भगवान की पूजा के साथ कलश स्थपना (Kalash Sthapana) होते ही शारदीय नवरात्री (Sharadiya Navratri) के पहले दिन माँ दुर्गा की पूजा (Maa Durga ki Puja) अर्चना शुरू हो गई है, शारदीय नवरात्री के पहले दिन मां शैलपुत्री की करें अराधना होती है, हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नाम ‘शैलपुत्री’ हुआ प्रथम माँ शैलपुत्री का वाहन वृषभ है. इस लिए माँ शैलपुत्री को ‘वृषारूढा’ के नाम से भी जानी जाती है. माँ के दये हाथ में त्रिशूल और बाये हाथ में कमल सुशोभित है. सती के नाम से माँ शैलपुत्री (Mata Shailputr) ही प्रथम माँ दुर्गा है, कलश स्थपना के बाद प्रथम माँ दुर्गा शैलपुत्री की पूजा अर्चना शुरू हो गयी है, माँ दुर्गा के इस स्वरूप को सौभाग्य और शान्ति का प्रतीक माना जाता है, माँ की अराधना से मन शान्त रहता है और घर धन-धान से भरा रहता है. मां शैलपुत्री हमेशा शक्तिमान होने का वरदान देती है.

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माँ शैलपुत्री की पूजा (Maa Shailputr ki puja) कैसे करे

कलश स्थापना (Kalash Sthapana) के बाद चौकी पर रखे श्री गणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका यानि 16 देवी, सात सिंदूर की बिंदी रखे इसके बाद माँ के सामने हाट जोड़कर व्रत और पूजन का संकल्प ले और माँ को 16 श्रंगार के वस्तुए अर्पित करे और माँ नवरात्री के पहले दिन की पूजा से शक्तिदायनी माता शैलपुत्री से आशीर्वाद लेकर घर में खुसिया लाये। आपको बता दे की शैलपुत्री का अर्थ पहाड़ो की पुत्री होता है और माँ शैलपुत्री के नवजात कन्या का स्वरूप है

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माता शैलपुत्री मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।
ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।ॐ शैलपुत्रै नमः।

माता शैलपुत्री की पूजा करने के लिए शुभ समय

  • अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक.
  • दिवस मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक.
  • सायंकालीन मुहूर्त शाम 6:00 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक.
  • रात्रिकालीन मुहूर्त रात्रि 9:00 बजे से 12 बजकर 04 मिनट तक.
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