Karva Chauth 2018 in India - wikifeed
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इस लिए करवा चौथ पर करती हैं’ महिलाए सोलह शृंगार! | करवा चौथ के दिन छलनी का महत्व…

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Saturday, 27 October, Karva Chauth 2018 in India: 27 अक्टूबर को करवा चौथ रखने वाली हर महिला को इन 16 शृंगार में आने वाली सभी चीज़ों के बारे में मालूम होना चाहिए.

करवा चौथ का व्रत शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं. इस दौरान वो पूरे दिन भूखी-प्यासी रहती हैं और रात को चांद निकलने के बाद अपने व्रत को खोलती हैं. इसी के साथ सभी सुहागिनें 16 शृंगार से खुद को सजाती हैं और सज संवरकर छलनी से चांद की पूजा करती हैं.

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हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के लिए महिलाओं का सोलह शृंगार बहुत महत्व रखता है, इसीलिए इस बार 27 अक्टूबर को करवा चौथ (Saturday, 27 October, Karva Chauth 2018 in India) रखने वाली हर महिला को इन 16 शृंगार में आने वाली सभी चीज़ों के बारे में मालूम होना चाहिए.

 

  • सिंदूर
  • मंगलसूत्र
  • बिंदी
  • मेहंदी
  • लाल रंग के कपड़े
  • चूड़ियां
  • बिछिया
  • काजल
  • नथनी
  • कर्णफूल (ईयररिंग्स)
  • पायल
  • मांग टीका
  • तगड़ी या कमरबंद
  • बाजूबंद
  • अंगूठी
  • गजरा

करवा चौथ के दिन छलनी का महत्व

करवा चौथ (Karwa Chauth) के व्रत में छलनी का बेहद महत्व है. इस दिन पूजा की थाली में महिलाएं सभी सामानों के साथ-साथ छलनी भी रखती है. करवा चौथ की रात महिलाएं अपना व्रत पति को इसी छलनी में से देखकर पूरा करती हैं. शादी-शुदा महिलाएं इस छलनी में पहले दीपक रख चांद को देखती हैं और फिर अपने पति को निहारती हैं. इसके बाद पति उन्हें पानी पिलाकर व्रत पूरा करवाते हैं. लेकिन कभी सोचा है पति और चांद दोनों को छलनी से ही क्यों देखा जाता है?

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हिंदू मान्यताओं के मुताबिक चंद्रमा को भगवान ब्रह्मा का रूप माना जाता है और चांद को लंबी आयु का वरदान मिला हुआ है. चांद में सुंदरता, शीतलता, प्रेम, प्रसिद्धि और लंबी आयु जैसे गुण पाए जाते हैं. इसीलिए सभी महिलाएं चांद को देखकर ये कामना करती हैं कि ये सभी गुण उनके पति में आ जाएं.

वहीं, छलनी को लेकर एक और पौराणिक कथा के मुताबिक एक साहूकार के सात लड़के और एक बेटी थे. बेटी ने अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था. रात के समय जब सभी भाई भोजन करने लगे तो उन्होंने अपनी बहन को भी खाने के लिए आंमत्रित किया. लेकिन बहन ने कहा – “भाई! अभी चांद नहीं निकला है, उसके निकलने पर अर्घ्‍य देकर भोजन करूंगी.” बहन की इस बात को सुन भाइयों ने बहन को खाना खिलाने की योजना बनाई.

भाइयों दूर कहीं एक दिया रखा और बहन के पास छलनी ले जाकर उसे प्रकाश दिखाते हुए कहा कि – बहन! चांद निकल आया है. अर्घ्‍य देकर भोजन कर लो. इस प्रकार छल से उसका व्रत भंग हुआ और पति बहुत बीमार हुआ.

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