Holi Festival 2020 - wikifeed
भारत में बड़े ही धूम - धाम के साथ मनाये जाने वाले इस ‘रंगों के त्यौहार’ के तौर पर मशहूर होली (Holi) का त्योहार फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है।
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Holi Festival 2020 Celebration: Why we celebrate holi in Hindi?

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होली की कहानी व होली क्यों मनाई जाती है | Holi Festival history, Holi Festival 2020 Celebration, Holika Dahan history, Prahlad story, Hiranyakashipu facts, Holi 2020 Celebration In Hindi

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Holi festival 2020 Why we celebrate Holi in hindi: भारत देश त्योहारों का देश है, यहाँ भिन्न जाति के लोग भिन्न भिन्न त्यौहार को बड़े उत्साह से मनाया करते है. भारत में बड़े ही धूम – धाम के साथ मनाये जाने वाले इस ‘रंगों के त्यौहार’ के तौर पर मशहूर होली (Holi) का त्योहार फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। यह त्यौहार बसंत ऋतू के स्वागत का त्यौहार माना जाता है. इस होली के त्यौहार को बड़े ही होस और हुल्लास के साथ मनाया जाता है. इस दिन तेज संगीत और ढोल नगाड़ो के बीच एक दूसरे पर रंग लगाकर और पानी फेंका जाता है। भारत के अन्य त्यौहारों की तरह होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। प्राचीन पौराणिक कथा के अनुसार होली का त्योहार (Holi Festival 2020), हिरण्यकश्यप की कहानी जुड़ी है।

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Holi Festival 2020 Celebration: Why we celebrate holi in Hindi?

(Holi Kab Hai) होली कब है? (Holi Festival 2020 Date and timing)

Holi 2020 in Uttar Pradesh will begin in the evening of Monday, 9 March and ends in the evening of Tuesday, 10 March Dates may vary. (इस साल 2020 में होली का त्यौहार 10 मार्च 2019 को मनाई जाएगी.

होली की कहानी व इतिहास (Mythological Story of Holi) होली क्यों मनाई जाती है (Holi Festival history)

हेलो दोस्तों! जैसा की आप सभी जानते की भारत संत – महात्माओ और देवी – देवताओ का देश माना जाता है. हमारे देश में यहां हर त्यौहार की अपनी एक अलग ही कहानी होती है, जो धार्मिक मान्यताओ पर आधारित होती है. होली (Holi) के पीछे भी एक कहानी है. कहानी यह है की हिरण्यकश्यप प्राचीन भारत का एक राजा था जो कि राक्षस की तरह था। वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था जिसे भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने मारा था। इसलिए अपने आप को शक्तिशाली बनाने के लिए उसने सालों तक प्रार्थना की। आखिरकार उसे वरदान मिला। लेकिन इससे हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझने लगा और लोगों से खुद की भगवान की तरह पूजा करने को कहने लगा।

Prahlad story and Holika Dahan History

लेकिन इस दुष्ट राजा का एक बेटा था जिसका नाम प्रहलाद (Prahlad story) था और वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। प्रहलाद (Prahlad) ने अपने पिता का कहना कभी नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। बेटे द्वारा अपनी पूजा ना करने से नाराज उस राजा ने अपने बेटे को मारने का निर्णय किया। उसने अपनी बहन होलिका (Holika) से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए क्योंकि होलिका आग में जल नहीं सकती थी। (होलिका को वरदान प्राप्त था, कि आग पर उसे विजय प्राप्त है, उसे अग्नी जला नहीं सकती) तो इस लिए उनकी योजना प्रहलाद को जलाने की थी, लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रहलाद सारा समय भगवान विष्णु का नाम लेता रहा और बच गया पर तभी अचानक होलिका जलने लगी और आकाशवाणी हुई, जिसके अनुसार होलिका को याद दिलाया गया, कि अगर वह अपने वरदान का दुरूपयोग करेगी, तब वह खुद जल कर राख हो जाएगी और ऐसा ही हुआ. प्रहलाद का अग्नी कुछ नहीं बिगाड़ पाई और होलिका जल कर भस्म हो गई. इसी तरह प्रजा ने हर्षोल्लास से उस दिन खुशियाँ मनाई और आज तक उस दिन को होलिका दहन (Holika Dahan history) के नाम से मनाया जाता है और अगले दिन रंगो से इस दिन को मनाया करते है.

कैसे मनाते हैं होली (How to Celebrate Holi in hindi 2020)

How to Celebrate Holi in hindi 2020 होली का त्यौहार पुरे भारत में मनाया जाता है, लेकिन उत्तर भारत के मथुरा Mathura, वृन्दावन Vrindavan, बरसाना Barsana, नंदगॉव Nandgaon और उतर प्रदेश Uttar Pradesh में इसे अधिक उत्साह से मनाया जाता है. होली का त्यौहार देखने के लिए लोग ब्रज, वृन्दावन, गोकुल जैसे स्थानों पर जाते है. इन जगहों पर यह त्यौहार कई दिनों तक मनाया जाता हैं. मथुरा ब्रज में ऐसी प्रथा है, जिसमे पुरुष महिलाओं पर रंग डालते है और महिलाए उन्हें डंडे से मारती है, यह एक बहुत ही प्रसिद्ध प्रथा है, जिसे देखने लोग मथुरा, वृन्दावन, बरसाना, जाते है. कई स्थानों पर फूलों की होली भी मनाई जाती है और गाने बजाने के साथ सभी एक दुसरे से मिलते है और खुशियाँ मनाया करते है.

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होली कहानी भगवान कृष्ण (Holi story of Lord Krishna)

Holi story of Lord Krishna: यह कहानी भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण (Lord Krishan) के समय तक जाती है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण रंगों से होली (Holi) मनाते थे, इसलिए होली का त्योहार (Holi Festival 2020) रंगों के रूप में लोकप्रिय हुआ। वे वृंदावन और गोकुल में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे। वे पूरे गांव में मज़ाक भरी शैतानियां करते थे। आज भी वृंदावन जैसी मस्ती भरी होली कहीं नहीं मनाई जाती। होली वसंत का त्यौहार है और इसके आने पर सर्दियां खत्म होती हैं। होली को ‘वसंत महोत्सव’ या ‘काम महोत्सव’ भी कहते हैं।

रंग पञ्चमी मध्य भारत के इन्दोर शहर की होली

मध्य भारत एवम महाराष्ट्र में रंग पञ्चमी का अधिक महत्त्व है, लोग टोली बनाकर रंग, गुलाल लेकर एक दुसरे के घर जाते है और एक दुसरे को रंग लगाते है और कहते है “बुरा न मानों होली है ”. मध्य भारत के इन्दोर शहर में होली की कुछ अलग ही धूम होती है, इसे रंग पञ्चमी की “गैर” कहा जाता है, जिसमे पूरा इंदोर शहर एक साथ निकलता है और नाचते गाते त्यौहार का आनंद लिया जाता. इस तरह के आयोजन के लिए 15 दिन पहले से ही तैयारिया की जाती है.

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रंगो के इस त्यौहार को “फाल्गुन महोत्सव” भी कहा जाता है, इसमें पुराने गीतों को ब्रज की भाषा में गाया जाता. भांग का पान भी होली का एक विशेष भाग है. नशे के मदमस्त होकर सभी एक दुसरे से गले लगते सारे गिले शिक्वे भुलाकर सभी एक दुसरे के साथ नाचते गाते है. होली पर घरों में कई पकवान बनाये जाते है. स्वाद से भरे हमारे देश में हर त्यौहार में विशेष पकवान बनाये जाते है.

होली समारोह

होली एक दिन का त्यौहार नहीं है। कई राज्यों में यह तीन दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन पूर्णिमा के दिन एक थाली में रंगों को सजाया जाता है और परिवार का सबसे बड़ा सदस्य बाकी सदस्यों पर रंग छिड़कता है। दूसरे दिन (Holika Dahan history) इसे पूनो भी कहते हैं। इस दिन होलिका के चित्र जलाते हैं और होलिका और प्रहलाद की याद में होली जलाई जाती है। अग्नि देवता के आशीर्वाद के लिए मांएं अपने बच्चों के साथ जलती हुई होली के पांच चक्कर लगाती हैं। और तीसरे दिन इस दिन को ‘पर्व’ कहते हैं और यह होली उत्सव का अंतिम दिन होता है। इस दिन एक दूसरे पर रंग और पानी डाला जाता है। भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियों पर भी रंग डालकर उनकी पूजा की जाती है.

 

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