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Christmas is celebrated as the birthday of Lord Jesus
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Christmas 2020: जानिए क्यों सजाते है क्रिसमस ट्री (Christmas Tree) और क्‍या है इसका इतिहास?

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Christmas 2020: जानिए क्यों सजाते है क्रिसमस ट्री (Christmas Tree) और क्‍या है इसका इतिहास?

क्रिसमस (Christmas) का त्‍योहार हम सभी के जीवन में एक नई तरह की खुशियां और उमंग लेकर आता है। ईसाइयों के साथ-साथ अन्‍य धर्म के लोग भी इस दिन क्रिसमस ट्री (Christmas Tree) अपने घर लेकर आते हैं और उसे सजाते हैं। मगर कभी सोचा है कि आखिर इस परंपरा की शुरुआत कैसे हुई और क्‍या है Christmas Tree को सजाने का इतिहास। आज जानिए क्रिसमस (Merry Christmas 2020) के मौके पर क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा के बारे में बताते हैं.

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क्रिसमस को प्रभु यीशू के जन्‍मदिन के तौर पर मनाया जाता है

दुनिया भर में क्रिसमस को प्रभु यीशू के जन्‍मदिन के तौर पर मनाया जाता है (Christmas is celebrated as the birthday of Lord Jesus) बच्‍चों के बीच में इस त्‍योहार का विशेष उत्‍साह देखा जाता है। बच्‍चों के मन में यह उमंग रहती है सांता क्‍लॉज आएंगे और उनके लिए गिफ्ट लाएंगे। Christmas Tree को सजाने में भी छोटे-छोटे गिफ्ट के बॉक्‍स का प्रयोग किया जाता है। रंग-बिरंगी अन्‍य सजावटी चीजों से क्रिसमस ट्री को सजाया जाता है।

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क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा से जुड़ा इतिहास

Christmas Tree को सजाने की परंपरा से जुड़ा इतिहास भी काफी रोच‍क है। ईसाई धर्म के अस्तित्व में आने से काफी पहले से एवरग्रीन यानी सदाबहार पौधे और पेड़ों का लोगों के जीवन में काफी महत्व था। वे अपने घरों को उन पेड़ों की डालियों से सजाते थे। उनका मानना था कि ऐसा करने से जादू-टोने का असर नहीं होता है, बुरी आत्माएं, भूत-प्रेत और बीमारियां दूर रहती हैं। प्राचीन मिस्र और रोम के लोग एवरग्रीन पौधों की ताकत और खूबसूरती पर यकीन करते थे।

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एक और कहानी

क्रिसमस ट्री से जुड़ी एक कहानी 722 ईसवी की भी है। जर्मनी के सेंट बोनिफेस को पता चल गया कि कुछ दुष्ट लोग एक विशाल ओक ट्री के नीचे एक बच्चे की कुर्बानी देंगे। सेंट बोनिफेस ने बच्चे को बचाने के लिए ओक ट्री को काट दिया। उसी ओक ट्री की जड़ के पास एक फर ट्री या सनोबर का पेड़ उग गया। लोग इसको चमत्‍कारिक वृक्ष मानने लगे। सेंट बोनिफेस ने लोगों को बताया कि यह एक पवित्र दैवीय वृक्ष है और इसकी डालियां स्‍वर्ग की ओर संकेत करती हैं। तब से लोग हर साल जीसस के जन्‍मदिन पर उस पवित्र वृक्ष को सजाने लगे।

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पुराने किस्‍से और कहानियों से इस बात की भी जानकारी मिलती है कि सबसे पहले क्रिसमस ट्री 1510 में लातविया के रीगा में सजाया गया था। पहले क्रिसमस ट्री को सेब, जिंजरब्रेड, वेफर्स और छोटे-छोटे केक (Christmas Cake) से सजाया जाता था। अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरह के पेड़ को क्रिसमस ट्री के तौर पर सजाया जाता है। जैसे न्यूजीलैंड में पोहटाकावा नामक के पेड़ को Christmas Tree के रूप में सजाया जाता है। इस पर लाल फूल लगे रहते हैं।

क्रिसमस ट्री को सजाने की शुरुआत ईसाई धर्म के समाज सुधारक मार्टिन लूथर ने की थी

माना जाता है कि क्रिसमस ट्री को सजाने की शुरुआत 16वीं सदी के ईसाई धर्म के समाज सुधारक मार्टिन लूथर ने की थी। ऐसी कहानी मिलती है कि 24 दिसंबर की शाम को वह एक बर्फीले जंगल से जा रहे थे, तो रास्‍ते में उन्हें एक सदाबहार पेड़ चमकता हुआ दिखाई दिया। इस दैवीय वृक्ष की शाखाएं चंद्रमा की रोशनी बेहद चमक रही थीं। इस पेड़ को देखकर मार्टिन लूथर बहुत प्रभावित हुए। उन्‍होंने वापस लौटकर ऐसे ही पौधे को घर में लगाया और जब यह वृक्ष के रूप में आ गया तो वह जीसस के जन्‍मदिन पर इसे हर साल मोमबत्तियों और गुबारों से सजाने लगे। फिर धीरे-धीरे क्रिसमय (Christmas)पर यह परंपरा चलन में आ गई और सारी दुनिया के लोग ऐसा करने लगे।

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