भारत के 7 जासूस - wikifeed
भारत के 7 जासूस जिन पर देश को आज भी गर्व है और इनके ऊपर बन चुकी है बॉलीवुड फिल्मे भी (7 Greatest Indian Spies we are proud of and Bollywood film has been made on them)
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भारत के इन जासूसों पर बन चुकी है ये बॉलीवुड फिल्मे और देश को आज भी है गर्व

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भारत के 7 जासूस जिन पर देश को आज भी गर्व है और इनके ऊपर बन चुकी है बॉलीवुड फिल्मे भी

दोस्तों वैसे तो जासूस की जिंदगी फ़िल्मी पर्दो पर बहुत मजेदार दिखाई जाती है. लेकिन रियल जिंदगी में उनकी जिंदगी उतनी ही खतरों से भरी होती है. एक अनजान देश में अनजान नाम के साथ अपने नाम को करने वाले ये लोग हरपल पकडे जाने के डर के वाले शाये में जीने के लिए मजबूर होते है. जिस तरह हमारे देश के फौजी हर वक्त बॉर्डर पर तैनात रहकर देश की रक्छा करते है. उसी तरह ये जासूस भी देश के लिए 24 घण्टे अपने मिशन को पूरा करने में लगे रहते है. और बहुत सी बार ऐसा भी होता है कई बार ये जाबाज अपनी ड्यूटी करते हुए शाहिद हो जाते है और इन्हे अपने बलिदान के बदले में सही सम्मान भी नहीं मिल पाता है. पर इन सब चीजों की परवह किये बिना ये लगातार अपने काम में लगे रहते है. तो दोस्तों आज हम आपको बताने वाले है भारत के ऐसे 7 जासूस जिन पर देश को गर्व है और इनके ऊपर बन चुकी है बॉलीवुड फिल्म (7 Greatest Indian Spies we are proud of and Bollywood film has been made on them) तो जानिए ऐसे ही भारत के 7 जबाजो की कहानी जिन्हे इतिहास में वह जगह कही नहीं मिली जिसके वो हक़ दार थे. तो आये जानते है की कोने थे वो जाबाज जिन्होंने असम्भव को सम्भव कर दिखाया।

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Sehmat khan (सहमत खान)

दोस्तों जानकारी के लिए बता दे की सहमत खान एक काल्पिनिक नाम है क्योकि इस महिला एजेंट का असली नाम कोई नहीं जानता। सहमत खान एक कश्मीरी रिच मुस्लिम बिजनेस मैन की बेटी थी. सहमत खान ने भारत के लिए जासूसी जैसा खतरनाक काम चुना। इस महिला जासूस ने एक पाकिस्तानी आर्मी अफसर से शादी की ताकि उनके पाकिस्तान जाने का रास्ता खुल सके और वो हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण जानकारी भेज सके उन्होंने 1971 की जंग के दौरान एक पाकिस्तानी अफसर की बीवी बनकर भारत के लिए जरुरी जानकारी इक्ठा की थी और उनकी इक्ठा की गई जानकारी की वजह से कई भारतीय सेनिको की जान बची थी. और आश्चर्य की बात तो ये है की वो पाकिस्तान से वापिस भारत भी आई और जब सहमत खान पाकस्तानी अफसर के बच्चे की माँ बनने वाली थी.

सहमत खान के पाकिस्तान में रहने के दौरान उन्हें उस पाकिस्तानी आर्मी अफसर से प्यार हो गया था. आप को बता दे की इस बहादुर महिला सहमत खान का बेटा भी आगे चलकर इंडियन आर्मी में भर्ती हुआ.

Saraswathi Rajamani (सरस्वती राजामणि)

एक ऐसे वक्त में जब हमारे समाज में महिलाओ को परदे से निकले की भी इजाजत नहीं थी उस समय सरस्वती राजामणि ने वह कर दिखाया था जो आज इतने शाल बाद भी एक मिशाल कायम करे हुए है. रंगून के एक परिवार में जन्मी सरस्वती राजामणि केवल 16 साल की उम्र में ही नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज से जुड़ गई. वह INA Military Intelligence का हिस्सा थी. Military Intelligence में रहते हुए भी उन्होंने अपने साथियो के साथ लड़को अंग्रेज अफसरों के केम्प और घर में रहना और काम करना शरू किया ये काम उन्होंने तक़रीबन 2 सालो तक किया। उन्होंने आजादी की लड़ाई में बहुत सी महत्पूर्ण जानकारिया इक्ठा की और सुरक्छित रूप से ऊपर तक पहुंचाई। उनके साथ एक घटना भी घटी थी जो की फिल्म से कम नहीं थी, एक बार सरस्वती राजामणि के साथी को अंग्रेजो ने गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन सरस्वती एक हिमत वाली महिला थी और वो एक डांसर के रूप में वहा पहुंची और अपने साथी को छुड़ाने में भी कामयाब रही.

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Saraswathi Rajamani (सरस्वती राजामणि)

हलाकि इस दौरान उन्हें पैर पर गोली भी लगी थी और वो तीन दिन भूखी प्यासी एक पेड़ पर भी रही थी. जिसके बाद उन्हें सुरक्छित कैम्प तक भी पहुचाया गया और उनकी जान बच पाई.

Ravindra Kaushik (रविंद्र कौशिक रॉ)

राजस्थान के श्रीगंगानगर के रहने वाले रविंद्र जो ब्लैक टाइगर के नाम से मशहूर थे. रविंद्र कौशिक रॉ को आज भी भारत के महान जासूसों में गिना जाता है. पेशे से थियेटर एक्टर रहे रविंद्र रॉ अधिकारियो की नजर में उस वक्त आये थे जब वह एक नाटक में भाग लेने लखनऊ पहुंचे जब रॉ के अधिकारियो ने उने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते थियेटर में देखा तो उन्हें Spies की जॉब ऑफर की इसके बाद रॉ की देख – रेख में तक़रीबन दो साल की ट्रेनिंग लेने के बाद रविंद्र पाकिस्तान चले गए जहा वह नबी अहमद शाकिर के नाम से रहने लगे, वहा उन्हने University of Karachi से अपनी LLB की पढ़ाई पूरी की इसी बीच रविंद्र पाकिस्तानी सेना में भर्ती हुए बल्कि प्रमोशन लेते हुए मेजर की रैंक तक पहुंच गए, उन्होंने पाकिस्तानी लड़की अमानत से सादी भी की.

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Ravindra Kaushik

रविंद्र कौशिक अपने पाकिस्तान में रहने के दौरान इन्होने भारत सरकार तक बहुत सी ख़ुफ़िया जानकारी और सूचनाएं पहुंचाई। जिसके चलते पाकिस्तान को मुक़ी खानी पड़ी, रविंद्र अपना काम सही तरह से कर रहे थे लेकिन तभी वहा के खुपिया एजेंसी के सामने उनका भेद खुल गया पकडे जाने पर रविंद्र ने जेल में बहुत सी यात्राओं से गुजरने के बावजूद भी भारत से जुड़े राजो को दबाये रखा. फिर जासूसी के जुर्म में उन्हें वह की अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई इसके बाद करीब 16 साल काटने के बाद साल 1999 में इनकी मौत हो गई.

Kashmir Singh (कश्मीर सिंह)

अपने पेशे से शानदार फोटोग्राफ रहे कश्मीर सिंह को इतिहास हमेशा नामुमकिन को मुमकिन बनाने के लिए हमेशा याद रखेगा। साल 1969 में पहली बार पाकिस्तान गए कश्मीर सिंह ने ही पाकिस्तान को चीन से मिले T59 tank के बारे में भारत को बताया था. अपनी फोटोग्राफी के हुनर का इस्तेमाल करते हुए कश्मीर सिंह ने अपने ख़ुफ़िया तरीके से पाकिस्तान के सैनिक ठिकानो की फोटो खींच कर भारत तक पहुंचाई जिसने 71 की लड़ाई में भारत की जीत सुनिश्चित की. महूमद अब्रहाम के नाम से पाकिस्तान में घुसे हुस्यारपुर पंजाब के रहने वाले कश्मीर सिंह ने वापिस भारत आने से पहले 35 साल पाकिस्तान की जेल में आकाश, रौशनी और बिना किसी से भी मिले एक अँधेरे कमरे में गुजारे इतना ही नहीं उन्हें पाकिस्तान अफसरों द्वारा थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया वो हत्यार और जरुरी तस्वीर ले जाने के लिए बॉडर क्रॉस किया करते थे, तभी जासूस मिशन से आते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया क्योकि उनके बने गाइड ने उन्हें धोका दिया पाकिस्तानी ‘International human rights law’ अंसार बुर्नेय की मदद से उन्हें भारत वापिस भेज दिया गया. हालांकि इन सब चीजों में मजेदार बात यह रही की पाकिस्तान भी कभी ये साबित नहीं कर पाया की कश्मीर सिंह भारत के लिए जासूसी करते थे.

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Kashmir Singh (कश्मीर सिंह)

Mohanlal Bhaskar (मोहनलाल भास्कर)

पाकिस्तान के खुफिया न्यू केयर प्रोग्राम को दुनिया के सामने लाने में अहम भूमिका निभाने वाले मोहनलाल भास्कर एक और ऐसे सख्श है जिनके बारे में लोग बहुत कम जानते है. मोहनलाल की बदौलत ही भारत 1974 में अपना पहला न्यू केयर टेस्ट सफलता के साथ कर पाया था. पाकिस्तान में महूमद असलम के नाम से रहते हुए मोहनलाल भास्कर ने पाकिस्तान की नाक के निचे से बहुत सी ख़ुफ़िया जानकारिया इकठा की पर अमरिख सिंह के नाम के एक डबल एजेंट द्वारा किये गए धोके के कारण मोहनलाल पकडे गए थे. वहा पर उन्हें पाकिस्तान की अदालत ने 14 साल की सजा सुनाई, पर भारत सरकार की कोशिसो के चलते मोहनलाल साल 1974 में भारत वापिस आगये। इसके बाद मोहनलाल ने अपने बिताये पाकिस्तान में दिनों पर ‘में पाकिस्तान में भारत का जासूस था’ जिसमे उन्होंने वहा की जेल में दी गई यातनाओ के बारे में बहुत विस्तार से लिखा, भारत आने पर उन्हने अपना जीवन सिक्छा के तोर पर बिताया।

Ajit Doval (अजित डोभाल)

दोस्तों मिस्टर अजित डोभाल 30 मई 2014 से नरेंद्र मोदी के National security (राष्ट्रीय सुरक्षा) एडवाइजर है. ये आईपीएस (IPS officer) जेम्स बॉन्ड के नाम से मशहूर है. इन्होने अपने 33 साल के करियर में 7 साल पुलिस की यूनिफॉर्म पहनी है. क्योकि आईपीएस (IPS officer) फिल्ड एजेंट नहीं बनते लेकिन उन्होंने देश के लिए कई Undercover operation (अंडरकवर ऑपरेशन) को अंजाम दिया है. जिनके बारे में सुनकर आप को गर्व महसूस होगा। ये जासूस के तोर पर 7 साल पाकिस्तानी जासूस बनकर पाकिस्तान में रहे थे, और भारत को इंपोटेंट खबर देते थे. उनके पाकिस्तान में रहने के दौरान एक दिलचस्प किस्सा भी हुआ था, दरशल उनके एक कान को बचपन में छेदा हुआ था और उनको पाकिस्तान में एक आदमी मिला जिन्होंने अजित डोभाल के छेदे कान को देख कर पहचान लिया की वो हिन्दू है और उस आदमी ने अजित डोभाल को अपने घर ले जाकर बताया की वो भी हिन्दू है और पिछले कई वर्षो से भेस बदल कर पाकिस्तान में रह रहे है और इतना ही नहीं अजित डोभाल कई हाइजैकिंग को टर्मिनेट करने में औपरेशन ब्लैक थंडर को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्हें भारत का दूसरा सबसे बड़ा सूर्य वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र (kirti chakra) से सम्मानित किया गया है.

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Ajit Doval (अजित डोभाल)

R. N. Kao (रामेश्वर नाथ काव)

अगर आज भारत के पास अपनी सुरक्छा के लिए रॉ जैसी शानदार एजेंसी है तो इसका श्रे पूरी तरह से R. N. Kao (रामेश्वर नाथ काव) को जाना चाहये मूल रूप से बनारस के रहने वाले रामेश्वर नाथ ने अपने करियर की शुरुआत (IPS officer) से की इसके बाद उन्हने आगे चल कर साल 1971 में ख़ुफ़िया एजेंसी की इस्थापना की जो आगे चल कर रॉ कहलाई रामेश्वर नाथ काव की बनाई हुई इस एजेंसी ने साल 1971 के लड़ाई में पाकिस्तान की कमर तोड़ कर रख दी थी R. N. Kao (रामेश्वर नाथ काव) के बारे में बात करते हुए फ्रांस की ख़ुफ़िया एजेंसी के मुख्या रहे (Count Alexandre De Marenches) ने का बार कहा था की रामेश्वर नाथ काव दुनिया के पांच सबसे महान इंटेलिजेंट ऑफिसर में से एक है इनके बारे में कहा जाता था की इनकी जिंदगी इतनी खुपिया थी की वो अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ दो बार कैमरे में कैद हुए.

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R. N. Kao (रामेश्वर नाथ काव)
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